Wednesday, October 21, 2026
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गोमती तट पर 25 व 26 मार्च को बिखरेगी सूर्य उपासना की सनातनी आभा,चैती छठ महापर्व को लेकर जुटा भोजपुरी समाज

  • बिहार की लोकआस्था, पूर्वांचल की परंपरा और सनातन संस्कृति की चमक के साथ लक्ष्मण मेला मैदान में होगा भव्य आयोजन

लखनऊ। लोकआस्था, तप, अनुशासन और सूर्य उपासना के महान पर्व चैती छठ को इस बार राजधानी लखनऊ में ऐतिहासिक, भव्य और प्रेरक स्वरूप देने की तैयारी तेज हो गई है। अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय के नेतृत्व में 25 एवं 26 मार्च 2026 को लक्ष्मण मेला मैदान, गोमती तट स्थित छठ घाट पर चैती छठ महापर्व का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए समाज के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने छठ घाट पर पहुंचकर साफ-सफाई, श्रमदान और तैयारियों का श्रीगणेश कर दिया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभुनाथ राय ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में कहा कि भोजपुरी समाज अपनी जड़ों, लोकसंस्कारों और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के संकल्प के साथ इस आयोजन को भव्य स्वरूप दे रहा है। उन्होंने कहा कि छठ पर्व समाज को जोड़ने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और सामूहिक आस्था को सशक्त बनाने का अद्भुत माध्यम है।

भारतीय लोकजीवन की जीवंत परंपरा है चैती छठ

प्रभुनाथ ने कहा कि चैती छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन की वह जीवंत परंपरा है, जिसमें नदी, प्रकृति, सूर्य, जल, व्रत, तप और मातृशक्ति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। बिहार और पूर्वांचल में यह पर्व सदियों से अपार श्रद्धा और अनुशासन के साथ मनाया जाता रहा है। हालांकि कार्तिक छठ की तुलना में चैती छठ का विस्तार अपेक्षाकृत कम दिखता है, लेकिन इसकी आध्यात्मिक गरिमा और लोकमंगल की भावना उतनी ही प्रखर मानी जाती है। ऐसे में भोजपुरी समाज इस पर्व को व्यापक पहचान दिलाने और पारंपरिक आस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से विशेष पहल कर रहा है।

लोकपरा परंके पुनर्जागरण के रूप में स्थापित करने की तैयारी

अखिल भारतीय भोजपुरी समाज इस बार चैती छठ को केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे संस्कृति, समाज और लोकपरंपरा के पुनर्जागरण के रूप में स्थापित करने की तैयारी में है। यही वजह है कि गोमती तट पर छठ घाट को सजाने-संवारने के साथ आयोजन की रूपरेखा भी व्यापक स्तर पर तैयार की जा रही है।

शुद्धता, संयम, तपस्या और लोकभक्ति की अनुपम छटा बिखरेगी

पर्व की शुरुआत 22 मार्च 2026 को नहाय-खाय से होगी। 23 मार्च को खरना, 24 मार्च 2026 को सायंकाल अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। जबकि 25 मार्च 2026 को सप्तमी की प्रातःकालीन बेला में उदीयमान सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर महापर्व का समापन होगा। इस पूरे अनुष्ठान में शुद्धता, संयम, तपस्या और लोकभक्ति की अनुपम छटा देखने को मिलेगी।

सनातन परंपरा की ऊंचाई को नई पहचान देगा चैती छठ

छठ घाट पर श्रमदान और तैयारियों में मनोज सिंह, वेद प्रकाश राय, जितेंद्र सोनकर, रामयतन यादव, संजय सिंह समेत अनेक कार्यकर्ता जुटे हैं। सभी का संकल्प है कि इस बार लखनऊ में चैती छठ महापर्व को ऐसा स्वरूप दिया जाएगा, जो लोकआस्था की गरिमा, भोजपुरी समाज की एकजुटता और सनातन परंपरा की ऊंचाई को नई पहचान देगा।

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