Wednesday, October 21, 2026
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जीव सृष्टि के लिए वन संरक्षण आवश्यक : योगी आदित्यनाथ

  • राष्ट्रीय वानिकी संवाद में बोले योगी – “हर व्यक्ति कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित अरण्य समागम ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के वन मंत्री डा.अरूण कुमार सक्सेना व वन राज्यमंत्री के.पी.मलिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री व अन्य मंचस्थ अतिथियों ने काफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। वानिकी संवाद में देश के विभिन्न हिस्सों से आये वनाधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीव सृष्टि के लिए वन संरक्षण व वन आच्छादन को बढ़ावा देना आवश्यक है। हर एक व्यक्ति ने प्रकृति के दुष्परिणामों को झेला है। धरती हमारी माता है हम सब इसके पुत्र हैं। मां के सम्मान में कोई खिलवाड़ न हो। इसलिए वन संरक्षण के लिए प्रयास करें और हर व्यक्ति कम से कम एक पेड़ अवश्य लगायें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम चक्र में बदलाव हुआ है। यह नई चेतावनी है। वन प्रकृति के संतुलन का आधारफॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स इस वर्ष की थीम है। सुरक्षा के मुद्दे पर हम लोगों ने बजट बढ़ाया है। सामाजिक वानिकी के लिए 800 करोड़ दिए हैं। वानिकी विश्वविद्यालय के लिए 50 करोड़ रूपये उपलब्ध कराया है। जटायु संरक्षण केन्द्र के लिए गोरखपुर में केन्द्र बनाया है। नेट कार्बन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में एक पालिसी बनी है। अयोध्या सोलर सिटी के रूप में विकसित हो रही है। विरासत वृक्ष घोषित करने की कार्यवाही चल रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन आच्छादन बढ़ना सुखद अनुभूति कराता है। 50 करोड़ वृक्षारोपण के लिए हमारे पास नर्सरी मौजूद है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की वैदिक कालीन परम्परा से लेकर वर्तमान की चुनौतियों के समय प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के कारण हो रहे दुष्परिणाम को झेला है। धरती हमारी माता है। हम सब इसके पुत्र हैं। हर पुत्र का मां के प्रति क्या दायित्व होता है। उसके सम्मान व सुरक्षा में उसके संरक्षण में दुनिया के हर नागरिक को यह सोचना चाहिए कि उसके स्तर पर किये जाने वाले प्रयास में कहां चूक हुई है।

वन जीवन का आधार व प्रकृति के संतुलन का आयाम प्रस्तुत करता है। वन है तो जल है। वन व जल है तो वायु है। वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इसके बगैर नहीं कर सकते।

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