Wednesday, October 21, 2026
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बिलासपुर में बर्ड फ्लू से हड़कंप, हजारों पक्षी नष्ट, बढ़ा संक्रमण का खतरा

बिलासपुर, बिलासपुर के कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हुई, लेकिन इसी बीच गंभीर लापरवाहियां उजागर हो गईं। हजारों पक्षियों की मौत के बावजूद सप्लाई जारी रहने और मरे हुए मुर्गों को खुले में फेंकने से संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बर्ड फ्लू संक्रमण ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोनी स्थित पोल्ट्री फार्म में हजारों मुर्गियों की मौत के बाद आज गुरूवार काे जांच में वायरस की पुष्टि हुई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर पक्षियों और अंडों को नष्ट किया गया। संक्रमण की पुष्टि के बाद एहतियातन करीब 22 हजार से अधिक पक्षियों और 25 हजार से ज्यादा अंडों को नष्ट किया गया है। साथ ही 79 क्विंटल चारा और हैचरी से जुड़ी सामग्री भी खत्म कर दी गई।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन की दो बड़ी चूक सामने आई हैं। पहली, खमतराई इलाके में मरी हुई मुर्गियों को खुले में फेंका जाना, और दूसरी, मौतों के बावजूद पूरे संभाग में चूजों और अंडों की सप्लाई जारी रहना। पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त संचालक जीएसएस तंवर ने स्वीकार किया कि 14 मार्च के बाद भी अलग-अलग जिलों में सप्लाई जारी रही। उन्होंने यह भी कहा कि मरी हुई मुर्गियों को फेंकने वाले की पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, पोल्ट्री फार्म में 16-17 मार्च के आसपास ही मुर्गियों की मौत शुरू हो गई थी। शुरुआत में करीब 100 पक्षियों की मौत को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया गया। अधिकारियों ने इसे मौसम में बदलाव का असर समझते हुए बिना जांच के कई मृत पक्षियों को दफना दिया।
स्थिति तब बिगड़ी जब पांच दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा हजारों में पहुंच गया। इसके बाद करीब 6 दिन की देरी से सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिसमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई। संक्रमण सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ाते हुए कोनी पोल्ट्री परिसर के एक किलोमीटर दायरे को संक्रमित क्षेत्र और 10 किलोमीटर तक के इलाके को निगरानी जोन घोषित कर दिया है। इस क्षेत्र में पक्षियों की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है।
एहतियात के तौर पर कानन पेंडारी जूलॉजिकल पार्क को 25 मार्च से एक सप्ताह के लिए बंद कर दिया गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वे कर रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर नियमों की अनदेखी जारी है। आसपास के गांवों में चिकन की बिक्री जारी है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन की टीम दुकानें बंद करवा रही है, लेकिन कुछ दुकानदार दोबारा उन्हें खोल दे रहे हैं।
डोर-टू-डोर सर्वे के दौरान सैकड़ों लोगों की जांच की गई, जिनमें कुछ में सर्दी-खांसी जैसे लक्षण पाए गए हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल लक्षण दिखने पर ही सैंपल जांच की जाएगी। वहीं, इस पूरे मामले में स्टाॅफ की कमी भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। विभाग का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी है।
फिलहाल प्रशासन का दावा है कि हालात पर नजर रखी जा रही है, लेकिन सामने आ रही लापरवाहियों ने इस दावे पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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