Wednesday, October 21, 2026
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योगी के सुशासन मॉडल और हिन्दुत्व छवि ने बदले सियासी समीकरण

लखनऊ। अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने एक बयान में देश की राजनीति, नेतृत्व और हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समय बड़ा बलवान होता है और देश के इतिहास से लेकर वर्तमान तक की घटनाओं को इसी संदर्भ में देखने की आवश्यकता है।

सोशल मीडिया फेसबुक पर जारी वीडियो में उन्होंने 2002 गोधरा कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस घटना ने देश की राजनीति को प्रभावित किया। उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व को लेकर उन्होंने कहा कि उनकी कार्यशैली से देशभर में उनकी लोकप्रियता बढ़ी और बाद में वे प्रधानमंत्री बने।

परमहंस आचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी से लोगों को कई बड़ी अपेक्षाएं थीं, जिनमें जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दे शामिल थे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने विकास के क्षेत्र में कई कार्य किए। जैसे सड़क, बिजली, पानी, शौचालय, अस्पताल और शिक्षण संस्थानों का विस्तार, लेकिन कुछ अपेक्षाएं अब भी अधूरी मानी जाती हैं। अपने बयान में उन्होंने हाल की नीतियों, विशेष रूप से यूजीसी की नई नियमावली को लेकर भी असंतोष जताया और कहा कि इससे कुछ समर्थकों में निराशा की भावना पैदा हुई है।

राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका में आ सकते हैं योगी

उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रति लोगों का विश्वास बढ़ रहा है और समर्थक उन्हें सख्त प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों में यह धारणा है कि भविष्य में वे राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका में आ सकते हैं।

सांस्कृतिक पुनरुत्थान के जरिए मजबूत होगा भारत, बनेगा हिंदू राष्ट्र

अपने बयान में परमहंस आचार्य ने पारंपरिक भारतीय शिक्षा और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करते हुए कहा कि गुरुकुल व्यवस्था, गोवंश संरक्षण तथा हर गांव में गौशाला, व्यायामशाला, यज्ञशाला और गुरुकुल पद्धति की पाठशालाओं की स्थापना जैसे विषयों पर काम होना चाहिए। इसके साथ ही धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने दावा किया कि समाज के एक वर्ग में यह विश्वास है कि भविष्य में देश इस दिशा में आगे बढ़ सकता है और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के जरिए भारत को मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, भारत का वर्तमान संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी संवैधानिक परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया और व्यापक सहमति आवश्यक होती है।

भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने की जरूरत

परमहंस आचार्य ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारतीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए समाज को सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने देशवासियों, नेताओं और समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे देशहित और जनहित में समय का सदुपयोग करें और सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने अंत में कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और समय को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।

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