Friday, August 7, 2026
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प्रदेश में आलू भण्डारण भण्डारण क्षमता 192 लाख मीट्रिक टन : उद्यान निदेशक

  • प्रदेश में आलू उत्पादन की स्थिति सुदृढ़, भण्डारण क्षमता पर्याप्त

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगभग 06 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में आलू की खेती की जाती है। इस वर्ष भी गत वर्ष की भांति आलू की अच्छी उपज होने से दामाें में गिरावट की संभावना व्यक्त की जा रही है। ऐसे में आलू किसानों को सही दाम पाने के लिए बाजार देखकर आलू की खुदाई करनी चाहिए और अपरिपक्व आलू की खुदाई से बचने की जरूरत है। अन्यथा अच्छे दाम नहीं मिलेंगे।

उद्यान विभाग के निदेशक भानु प्रकाश राम ने शुक्रवार को बताया कि नये आलू की आवक मंडियों में लगभग मध्य दिसंबर से प्रारम्भ हो जाती है। नये आलू का छिलका पूर्ण रूप से परिपक्व न होने के कारण यह भण्डारण योग्य नहीं होता तथा मुख्यतः भोज्य आलू के रूप में उपभोग किया जाता है। मंडियों में नये आलू की अधिक आवक होने से मांग-आपूर्ति के सिद्धान्त के अनुसार बाजार भाव पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

प्रदेश में वर्तमान में कुल 2243 निजी शीतगृह संचालित हैं, जिनकी कुल भण्डारण क्षमता लगभग 192 लाख मीट्रिक टन है। वर्ष 2025 में लगभग 159 लाख मीट्रिक टन आलू का भण्डारण किया गया था, जबकि लगभग 33 लाख मीट्रिक टन भण्डारण क्षमता अवशेष रूप में उपलब्ध रही। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में आलू भण्डारण के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। शीतगृहों में आलू भण्डारण का कार्य सामान्यतः मध्य फरवरी से आरम्भ होता है।

निदेशक भानु प्रकाश राम ने आलू उत्पादक कृषकों को सलाह दी है कि वे अपनी उपज की खुदाई, विपणन एवं भण्डारण की समुचित योजना बनाएं तथा बाजार भाव की अनुकूलता के अनुसार आलू का विक्रय अथवा भण्डारण कर अधिकतम लाभ प्राप्त करें।

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