Tuesday, June 16, 2026
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महामना मालवीय मिशन की स्थापना का उद्देश्य राष्ट्रीय चिंतन को जन-जन तक पहुँचाना है – प्रमील पाण्डेय

वाराणसी। महामना मालवीय मिशन में काशी हिंदू विश्वविद्यालय इकाई के संगठन मंत्री प्रमील पाण्डेय ने रविवार काे विद्वत समाज में परिचर्चा में कहा कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और शिक्षा के क्षेत्र में यदि किसी एक महापुरुष का योगदान सबसे अधिक प्रेरणादायी माना जाए, तो निस्संदेह वह नाम है, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का है।

उन्होंने केवल एक विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं की, बल्कि ऐसे राष्ट्र निर्माताओं की पीढ़ियाँ तैयार करने का स्वप्न देखा, जो ज्ञान, चरित्र और राष्ट्रभक्ति के आदर्शों से ओतप्रोत हों। इसी महान संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए 9 अप्रैल 1978 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातन छात्रों के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। यह निर्णय था, महामना मालवीय मिशन की स्थापना का। इसका उद्देश्य केवल महामना के विचारों का स्मरण करना नहीं, बल्कि उनके आदर्शों, मूल्यों और राष्ट्रीय चिंतन को जन-जन तक पहुँचाना है।

संगठन मंत्री प्रमील पाण्डेय ने रविवार को विद्वत समाज में परिचर्चा में कहा कि वस्तुतः महामना मालवीय मिशन, काशी हिंदू विश्वविद्यालय की एक जीवंत पूरक संस्था है। जहाँ विश्वविद्यालय विभिन्न विषयों के विद्वान, वैज्ञानिक, चिकित्सक, अभियंता और विशेषज्ञ तैयार करता है। वहीं मिशन उन आदर्शों की लौ को प्रज्ज्वलित रखने का कार्य करता है, जिनके बल पर महामना ने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना की थी। यह मिशन ज्ञान को संस्कारों से जोड़ने और शिक्षा को राष्ट्रसेवा का माध्यम बनाने का सतत प्रयास कर रहा है।

महामना मालवीय मिशन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य पंडित मदन मोहन मालवीय के विचारों और लेखन को संरक्षित करना रहा है। मिशन द्वारा महामना के 23 वाङ्मयों का प्रकाशन किया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि महामना मालवीय मिशन केवल विचारों की बात नहीं करता, बल्कि सेवा को अपने कार्य का आधार मानता है। सोनभद्र के वनवासी क्षेत्र अनपरा में 65 बच्चों के लिए छात्रावास का संचालन इस बात का प्रमाण है, कि मिशन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से इन बच्चों के जीवन में आशा का दीप जलाया जा रहा है। देशभर में मिशन की 31 इकाइयाँ विद्यालयों, सिलाई केंद्रों और अन्य सेवा परियोजनाओं का संचालन कर रही हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का संदेश समाज के वंचित वर्गों तक पहुँच रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि महामना की पावन बगिया के कुछ समर्पित मानस पुत्रों द्वारा वर्ष 1978 में रोपा गया एक छोटा-सा बीज आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। यह वटवृक्ष अपनी गहरी जड़ों में महामना के आदर्शों, मूल्यों और राष्ट्रभक्ति की चेतना को संजोए हुए निरंतर फल-फूल रहा है। इसकी छाया में हजारों कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, समाजसेवी और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। महामना मालवीय मिशन आज भी उसी समर्पण, निष्ठा और तपस्या के साथ दिन-रात कार्यरत है, जिससे महामना के विचारों का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच सके। जो निरंतर नए लोगों को जोड़ते हुए उनके विचारों की अमर ज्योति को प्रज्ज्वलित रखे हुए है।

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