Tuesday, June 16, 2026
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‘पांचाल शोध एवं विकास समिति फर्रुखाबाद की ऐतिहासिक धरोहरों का करेगी जीर्णोद्धाए

फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के जनपद फर्रुखाबाद की पौराणिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से ‘पांचाल शोध एवं विकास समिति’ की एक बैठक बेवर रोड स्थित एक होटल में संपन्न हुई। बैठक में जिले के विकास और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए प्रबुद्धजनों ने गहन मंथन कर कई निर्णय लिए हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया है कि जनपद फर्रुखाबाद के सभी विकास खंड स्तर पर विशेष कमेटियों का गठन किया जाएगा। ये कमेटियां अपने-अपने क्षेत्रों में उपेक्षित पड़ी पौराणिक व ऐतिहासिक धरोहरों का स्थलीय निरीक्षण कर सूचीकरण करेंगी और जीर्णोद्धार के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगी। समिति ने इस पूरे कार्य के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की है। इन कमेटियों को दो माह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट मुख्य समिति को सौंपनी होगी। इसके बाद शासन-प्रशासन के सहयोग से पुनरुद्धार का कार्य शुरू कराया जाएगा।

संस्था के संयुक्त सचिव भूपेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि संस्था पिछले 10 वर्षों से एनआईएफटी दिल्ली व रायबरेली , इनटैक और अन्य शोधकर्ताओं को जनपद में सहयोग कर रही है। साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के साथ एमओयू सहित कई कार्य किए गए हैं। संस्था ने पुरातत्व विभाग से मांग की है कि संरक्षित धरोहरों व स्थानों पर नए सिरे से अन्वेषण कराया जाए, ताकि नए तथ्य सामने आ सकें। ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व की धरोहरों को संरक्षित कर उनका जीर्णोद्धार हो। जिले के समृद्ध इतिहास को सहेजने के लिए ‘कॉफी टेबल बुक’ और ‘फर्रुखाबाद गजेटियर’ का प्रकाशन किया जाए।

इस बैठक में मुख्य रूप से संस्था के संरक्षक ठाकुर वीरेंद्र सिंह राठौर, अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता (पूर्व डीजीसी) सुरेंद्र सिंह सोमवंशी, सचिव भानु प्रकाश मिश्रा, अनिल प्रताप सिंह, एम.आर. पाल, कैप्टन डी.एस. राठौर, डॉ. मुकेश सिंह राठौर, जीतेन्द्र सिंह, शरद चंदेल, राजीव बाजपेई, सत्यपाल सिंह, प्रदीप सिंह और मोहम्मद आकिब खां सहित कई प्रबुद्धजनों व इतिहास प्रेमियों ने एकजुट होकर जिले की धरोहरों को उनका पुराना गौरव वापस दिलाने का संकल्प लिया।

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