Saturday, August 8, 2026
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अयोध्या को नकारने वाले आज राम मंदिर पर नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे: मिथिलेशनन्दिनी शरण

  •  चंदा प्रकरण को लेकर श्रीराम जन्मभूमि की महिमा धूमिल करने वालों को आचार्य मिथिलेशनन्दिनी का करारा जवाब

     करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत व धर्मसम्मत नही

    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच अयोध्या के प्रख्यात संत, विचारक एवं सिद्धपीठ श्री हनुमत निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेशनन्दिनी शरण महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार का अपराध, अनियमितता या अनैतिक कृत्य हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को दंड भी मिलना चाहिए। लेकिन, इस बहाने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को कटघरे में खड़ा करना न तो न्यायसंगत है और न ही धर्मसम्मत।

    उन्होंने कहा कि आज अयोध्या पर टिप्पणी करने वालों की अचानक बाढ़ आ गई है। ऐसे लोग भी नैतिकता का उपदेश दे रहे हैं, जिनकी पीढ़ियां भ्रष्टाचार, बेईमानी और लूट के आरोपों से घिरी रही हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की पहचान देश को लूटने के आरोपों से बनी, वे भी आज धर्म और ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं। आचार्य ने कहा कि जिनके पूर्वज अयोध्या की ओर देखने से भी कतराते थे, वे भी आज श्रीराम जन्मभूमि पर टिप्पणी करने में सबसे आगे हैं।

    बिना तथ्य स्वयंभू प्रवक्ता बनना उचित नहीं

    महाराज ने कहा कि सत्य प्रिय वचन बिचारी सार्वजनिक जीवन का आदर्श है। यदि कोई अपराध हुआ है तो उसकी निंदा होनी चाहिए, लेकिन बिना पूरे तथ्य सामने आए सोशल मीडिया, मोबाइल और कैमरे के सामने बैठकर हर व्यक्ति स्वयंभू प्रवक्ता बन जाए, यह उचित नहीं है। दूसरों का न्याय करने से पहले स्वयं का आत्ममंथन जरूरी हैl

    उन्होंने अपने प्रवचन में एक प्रसिद्ध कथा सुनाई। कथा में एक चोर को मृत्युदंड सुनाया गया, लेकिन उसने राजा से कहा कि पहले यह पता कर लिया जाए कि राज्य में ऐसा कौन है जिसने जीवन में कभी चोरी न की हो। उसने मोती की खेती का प्रसंग सुनाया, जिसमें शर्त थी कि वही व्यक्ति मोती काट सकता है जिसने कभी चोरी न की हो। जब राजपुरोहित, मंत्री और अंत में स्वयं राजा तक पहुंचे तो सभी ने स्वीकार किया कि जीवन में उनसे भी किसी न किसी रूप में चोरी या भूल हुई थी। तब चोर ने कहा कि जब पूरा राज्य किसी न किसी गलती का भागी है तो अकेले मुझे ही कठघरे में क्यों खड़ा किया जा रहा है।

    आचार्य मिथिलेशनन्दिनी शरण महाराज ने कहा कि यही स्थिति आज दिखाई दे रही है। एक छोटी-सी घटना को आधार बनाकर लोग स्वयं को सबसे बड़ा नैतिक और धर्मात्मा सिद्ध करने में लगे हैं। कोई भी व्यक्ति यह दावा नहीं कर सकता कि उसके जीवन में कभी कोई चूक नहीं हुई। इसलिए दूसरों का न्याय करने से पहले स्वयं का आत्ममंथन आवश्यक है।

    अयोध्या को बदनाम करने की कोशिश में जुटे हैं कुछ लोग

    उन्होंने कहा कि देश में हजारों-करोड़ रुपये के घोटालों के आरोप लगे, अनेक सरकारें भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरीं, बड़े-बड़े धार्मिक संस्थानों में भी करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन वहां इतनी बेचैनी दिखाई नहीं देती। केवल श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की महिमा कम करने और उसकी प्रतिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगाने के लिए एक वर्ग लगातार सक्रिय दिखाई देता है।

    प्रभु श्रीराम अंतर्यामी हैं, फैसला वही करेंगे

    महाराज ने कहा कि श्रीराम अंतर्यामी हैं। अंतिम निर्णय वही करेंगे। इसलिए लोगों को दूसरों के दोष गिनाने के बजाय अपने आचरण को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। कालिदास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सत्य बोलने वाला व्यक्ति कम बोलता है, क्योंकि अधिक बोलने से सत्य की मर्यादा टूट जाती है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम उसी हृदय में निवास करते हैं, जहां सत्य, मधुर वाणी, विनम्रता, ईर्ष्या का अभाव, दूसरों के गुणों को स्वीकार करने की प्रवृत्ति, अहंकार का त्याग और भगवान के प्रति निष्काम भक्ति हो। समाज को विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बजाय इन्हीं मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है।

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