Friday, August 7, 2026
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दूरबीन सर्जरी से बचाया गया 09 वर्षीय बच्चे का घुटना

गोरखपुर। आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की दक्षता ने एक 09 वर्षीय बच्चे का घुटना ही नहीं, बल्कि उसका उज्ज्वल भविष्य भी सुरक्षित कर दिया। गोरखपुर के संकट मोचन हॉस्पिटल में घुटना एवं स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह “श्रीनेत” ने दूरबीन (आर्थ्रोस्कोपी) विधि से एक अत्यंत जटिल एवं दुर्लभ सर्जरी सफलतापूर्वक कर बच्चे को सामान्य जीवन की ओर लौटाया।

दर्द, झटके और चलने में परेशानी से जूझ रहा था मासूम

जानकारी के अनुसार 9 वर्षीय बच्चा लंबे समय से दाहिने घुटने में दर्द और चलते समय झटके आने की समस्या से परेशान था। कुछ दिन पहले दौड़ते समय उसके घुटने में तेज दर्द शुरू हो गया, जिसके बाद उसकी परेशानी और बढ़ गई। दर्द इतना अधिक था कि उसे सामान्य रूप से चलने-फिरने में भी कठिनाई होने लगी।

परिजनों ने इलाज के लिए मुंबई सहित विभिन्न स्थानों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया, लेकिन बीमारी का सही कारण स्पष्ट नहीं हो सका। अंततः बच्चे को गोरखपुर स्थित संकट मोचन हॉस्पिटल लाया गया, जहां घुटना रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित सिंह “श्रीनेत” ने विस्तृत जांच एवं एमआरआई कराने की सलाह दी।

जन्मजात थी घुटने की दुर्लभ समस्या

एमआरआई रिपोर्ट के आधार पर डॉ. अमित सिंह ने बताया कि बच्चे के घुटने के भीतर मौजूद मेनिस्कस (घुटने का कुशन) सामान्य से अधिक बड़ा और मोटा था। इस दुर्लभ जन्मजात स्थिति को डिस्कॉइड मेनिस्कस (Discoid Meniscus) कहा जाता है। मेनिस्कस फटकर घुटने के पिछले हिस्से में चला गया था, जिससे दर्द, लॉकिंग और चलने में झटके जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं।

उन्होंने बताया कि यदि समय रहते इसका उपचार नहीं किया जाता तो भविष्य में बच्चे को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता था।

*दूरबीन विधि से किया मेनिस्कस का सफल रिपेयर*

बच्चे की कम उम्र को देखते हुए चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि पूरा मेनिस्कस निकाल देने पर भविष्य में घुटने में गठिया (ऑस्टियोआर्थराइटिस) होने का खतरा बढ़ सकता था और खेलकूद व सामान्य गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता।

इसी कारण विशेषज्ञ टीम ने आधुनिक आर्थ्रोस्कोपिक (दूरबीन) सर्जरी का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान केवल मेनिस्कस के अतिरिक्त बड़े और क्षतिग्रस्त हिस्से को हटाया गया तथा शेष स्वस्थ मेनिस्कस का सफल रिपेयर किया गया। इससे घुटने की प्राकृतिक संरचना भी सुरक्षित रही और भविष्य की संभावित जटिलताओं से भी बचाव हो गया।

प्रदेश ही नहीं, देश में भी गिने-चुने मामलों में शामिल

डॉ. अमित सिंह श्रीनेत ने बुधवार काे बताया कि इस प्रकार की सर्जरी आमतौर पर वयस्क मरीजों में की जाती है, लेकिन मात्र 9 वर्ष की आयु में इस तरह की सफल आर्थ्रोस्कोपिक मेनिस्कस रिपेयर सर्जरी अत्यंत दुर्लभ है। प्रदेश में ऐसे मामले बहुत कम हुए हैं और संभवतः पूरे देश में भी ऐसे सफल ऑपरेशन गिने-चुने ही हैं।

उन्होंने कहा कि इस सफल सर्जरी के बाद बच्चे के घुटने का दर्द पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद है तथा वह भविष्य में सामान्य बच्चों की तरह दौड़-भाग और खेलकूद की गतिविधियों में भाग ले सकेगा।

आधुनिक तकनीक से सुरक्षित हुआ बच्चे का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर सही पहचान, आधुनिक तकनीक और सटीक सर्जिकल निर्णय के कारण बच्चे के घुटने को सुरक्षित रखा जा सका। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा विज्ञान की प्रगति का उदाहरण है, बल्कि पूर्वांचल में जटिल आर्थ्रोस्कोपिक सर्जरी की बढ़ती विशेषज्ञता का भी प्रमाण मानी जा रही है।

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