Thursday, June 18, 2026
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निजीकरण और उत्पीड़न के नाम पर संविदा कर्मियों की हो रही छंटनी से बढ़ रही दुर्घटनाएं : उप्र विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने निजीकरण और उत्पीड़न के नाम पर संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर की जा रही छंटनी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने सोमवार को इस संबंध में कहा कि इससे शेष कर्मचारियों पर कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है और संविदा कर्मियों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।

संघर्ष समिति ने मांग की कि बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध चल रही समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।

शक्ति भवन में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने विगत एक माह के दौरान कार्य करते हुए जान गंवाने वाले संविदा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के लिए संविदा कर्मी दिन-रात कार्य कर रहे हैं, लेकिन कर्मचारियों की भारी कमी और अत्यधिक कार्यभार के कारण उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है।

संघर्ष समिति के संयोजक ने बताया कि निजीकरण के नाम पर की जा रही तथाकथित “डाउनसाइजिंग” के तहत प्रत्येक उपकेंद्र पर संविदा कर्मियों की संख्या पहले 36 से घटाकर 18.5 कर दी गई थी। इसके बाद तथाकथित “वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग” लागू किए जाने के पश्चात कई स्थानों पर यह संख्या घटाकर मात्र 7.5 कर दी गई है। नए टेंडरों में भी संविदा कर्मियों की संख्या में 45 प्रतिशत से अधिक की कटौती कर दी गई है। राजधानी लखनऊ सहित जिन क्षेत्रों में वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है, वहां स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।

संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण कुशल संविदा कर्मियों के स्थान पर अकुशल कर्मियों से कार्य कराया जा रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। अत्यंत अल्प वेतन पर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों को बढ़ते कार्यभार और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

संघर्ष समिति के अनुसार, 22 अप्रैल से 28 मई 2026 के बीच लगभग 22 संविदा कर्मियों की कार्य के दौरान मृत्यु हुई है। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मृतक अकुशल श्रेणी के कर्मचारी थे। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन निजीकरण की नीति को लागू करने के लिए लगातार कर्मचारियों का उत्पीड़न कर रहा है तथा अत्यंत अल्प वेतनभोगी संविदा कर्मियों के प्रति अमानवीय और असंवेदनशील रवैया अपना रहा है।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए डाउनसाइजिंग के नाम पर हटाए गए सभी संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए, वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर रोजगार से वंचित किए गए कर्मियों को पुनः नियुक्त किया जाए तथा बिजली कर्मियों के विरुद्ध की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए। संघर्ष समिति ने कहा कि इससे बिजली कर्मी प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आम जनता को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेंगे।

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