Monday, August 3, 2026
Homeदेशमुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया...

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

लखनऊ, 6 मार्च (आईडब्ल्युएनए)।पहली बार लोकतंत्र में कानून व्यवस्था किसी चुनाव में मुद्दा बनी और इसी का परिणाम है कि आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के बाद दोबारा सरकार बनायी। पुलिस विभाग ने वर्ष 2017 के बाद बिगड़े, अराजक, दंगाग्रस्त और कर्फ्यूग्रस्त राज्य को बदल करके सेफ यूपी के रूप में स्थापित किया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनाने की शुरुआत कड़ी सुरक्षा से ही होती है। विकास की पहली शर्त सुरक्षा है। इसे उत्तर प्रदेश पुलिस ने साबित किया है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन सभागार में कहीं। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 50 क्यूआरटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने होंडा इंडिया फाउंडेशन द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस को 50 क्यूआरटी दोपहिया वाहन प्रदान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। यह समारोह उसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक है, जिसमें शासन, प्रशासन और उद्योग जगत मिलकर प्रदेश के विकास और सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी का परसेप्शन चेंज करने के लिए कई कदम उठाए गए तो कुछ रिफॉर्म किये गये। इसके नतीजे हम सबके सामने हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस में वर्ष 2017 में पीआरवी के वाहन 9,500 थे। आज इनकी संख्या प्रदेश में 15,500 से अधिक है। वहीं वर्ष 2017 में टू व्हीलर मात्र 3,000 थे। आज इनकी संख्या 9,200 से अधिक है। यह केवल संख्या नहीं है, इसने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम लाने में सफलता प्राप्त की है। आपातकालीन स्थिति में जितनी त्वरित कार्रवाई और सहायता पहुंचाएंगे, वही ट्रस्ट में बदलती है। वह ट्रस्ट ही ट्रांसफॉर्मेशन का कारण बनता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मॉडल पुलिसिंग के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ बताएं हैं। इनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी शामिल है। वर्ष 2017 से पहले पुलिस विभाग का बजट अटकते-अटकते 16,000 करोड़ तक पहुंच पाता था और वह भी खर्च नहीं हो पाता था। वर्षों पहले जिले बने थे, लेकिन जिला मुख्यालय, पुलिस लाइन भी नहीं बनी थी। ऐसे में पुलिस क्या परिणाम देती? पुलिस के पास पुराने असलहे थे, कोई सुविधा नहीं थी। उस दौरान अवस्थापना सुविधाएं जीरो थीं।। टूटे हुए बैरक में पुलिसकर्मी रहने को मजबूर थे। आज प्रदेश के 55 जिलों में सबसे ऊंची इमारत उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों की बैरक है। यहां बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही प्रदेश में लगातार मॉडल थानों और मॉडल फायर स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे पुलिस और आपदा सेवाओं को आधुनिक स्वरूप दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में जब सरकार ने बड़े स्तर पर पुलिस भर्ती की प्रक्रिया शुरू की तो उस समय उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता बहुत सीमित थी। एक साथ लगभग 3000 पुलिसकर्मियों को ही प्रशिक्षण दिया जा सकता था। सरकार के सामने चुनौती थी कि लंबे समय से पुलिस भर्ती नहीं हुई थी और युवाओं में भर्ती को लेकर उत्सुकता थी, लेकिन प्रशिक्षण क्षमता सीमित होने के कारण भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाना कठिन था। किसी भी भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 9 महीने का समय लग जाता था। ऐसे में राज्य सरकार ने अन्य राज्यों से संपर्क किया। दो-तीन राज्यों ने सहयोग के लिए सहमति दी। इसके अलावा सेना और अर्द्धसैनिक बलों से भी बातचीत की गई, जिन्होंने सहयोग देने की बात कही। इन सभी प्रयासों के बाद किसी तरह प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाकर लगभग 17 से 20 हजार तक पहुंचाया गया। इसके बाद अन्य राज्यों तथा सैन्य प्रशिक्षण केंद्रों की मदद से इसे करीब 30 हजार तक ले जाया गया, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज प्रदेश में 60,244 पुलिस कांस्टेबलों की भर्ती की गई है और इन सभी को उत्तर प्रदेश के अपने प्रशिक्षण केंद्रों में ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेश में विकसित किए गए नए पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यह संभव हो पाया है।

हर जिले में तैनात की गईं दो-दो मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष जुलाई में देश में तीन नए आपराधिक कानून लागू किए गए। इन कानूनों के तहत सात वर्ष से अधिक की सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक साक्ष्य अनिवार्य किए गए हैं। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो फॉरेंसिक लैब थीं, लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इसके साथ ही प्रदेश में विश्वस्तरीय स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट भी स्थापित किया गया है, जो उत्तर प्रदेश पुलिस के अधीन संचालित हो रहा है। इस संस्थान में डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से पुलिस कर्मियों के साथ-साथ उन युवाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनकी रुचि फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में है। प्रत्येक जिले में ए-ग्रेड की छह फॉरेंसिक लैब निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा हर जिले में दो-दो मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट भी तैनात की गई हैं, जो घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य संग्रह और जांच में मदद कर रही हैं। प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए कई नई इकाइयों का गठन किया गया है। राज्य में स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (एसएसएफ) का गठन किया गया है और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसके अलावा पहली बार पीएसी में महिला बटालियन का गठन किया गया है। अब तक तीन महिला बटालियन गठित की जा चुकी हैं और तीन नई बटालियनों के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।

सुरक्षित बेटियां और व्यापारी प्रदेश और देश के विकास में ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास प्रारंभ किए गए। इन सभी को मिलाकर जब टेक्नोलॉजी और ट्रांसफॉर्मेशन एक साथ काम करते हैं तो रिजल्ट आता है। यही कॉमन मैन के ट्रस्ट का आधार बनता है। आज देश और दुनिया के बड़े निवेशक उत्तर प्रदेश में निवेश करना चाहते हैं। इसका प्रमुख कारण राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस और जीरो करप्शन की नीति है। इसके साथ ही प्रदेश में हर बेटी सुरक्षित है और व्यापारी भी सुरक्षा का अनुभव करते हुए अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। साथ ही प्रदेश और देश के विकास में ग्रोथ इंजन की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 19 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है, जो अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पहले प्रदेश में पर्याप्त पुलिस बल नहीं था, जिसके कारण बड़ी चुनौतियों का सामना करना कठिन हो जाता था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और उत्तर प्रदेश पुलिस हर बड़ी चुनौती का सामना करने में सक्षम है। आज उत्तर प्रदेश पुलिस और पीएसी की डिमांड देश के अन्य राज्यों में भी की जाती है।

इस अवसर पर मुख्य सचिव एसपी गोयल, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण, अपर पुलिस महानिदेशक (लॉजिस्टिक) राम कुमार, एडीजी लॉ एंड आर्डर अमिताभ यश, होंडा इंडिया फाउंडेशन के वाइस प्रेसीडेंट कॉर्पोरेट अफेयर्स पीयुष मित्तल आदि उपस्थित थे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments