Sunday, August 9, 2026
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीएचयू में निर्माणाधीन ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का किया निरीक्षण

150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 200 बेड का सात मंजिला अत्याधुनिक अस्पताल, बुजुर्गों को मिलेगी विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के अंतिम दिन शनिवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर स्थित निर्माणाधीन अत्याधुनिक ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने भवन निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से उच्च गुणवत्ता के साथ परियोजना पूर्ण करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी परियोजना की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित समयसीमा के भीतर केंद्र का निर्माण कार्य पूरा हो सके।

गाैरतलब है कि बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान परिसर में बुजुर्गों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस सात मंजिला भवन में 200 बिस्तरों की व्यवस्था होगी। यह केंद्र देश का तीसरा तथा उत्तर भारत का प्रमुख जेरिएट्रिक (जराचिकित्सा) संस्थान होगा। वर्तमान में इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

इस केंद्र में बुजुर्ग मरीजों के लिए मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक ओपीडी, मेमोरी क्लिनिक, गठिया (अर्थराइटिस) क्लिनिक सहित कई विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अतिरिक्त मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, अत्याधुनिक जांच एवं रेडियोलॉजी सेवाएं, पुनर्वास केंद्र, डे-केयर सुविधा, आईसीयू तथा निजी वार्ड भी स्थापित किए जाएंगे।

‘नेशनल सेंटर फॉर एजिंग’ केवल उपचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरा चिकित्सा के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और अनुसंधान को भी बढ़ावा देगा। यहां वरिष्ठ चिकित्सकों एवं सीनियर रेजिडेंट्स की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ एमडी जेरिएट्रिक मेडिसिन की स्नातकोत्तर सीटों का भी विस्तार किया जाएगा। केंद्र में वृद्धावस्था से जुड़ी बीमारियों और समस्याओं पर विशेष शोध किए जाएंगे तथा बुजुर्गों के उपचार और देखभाल के लिए मानक दिशा निर्देश विकसित किए जाएंगे। साथ ही जेरिएट्रिक मेडिसिन विभाग के माध्यम से डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को बुजुर्गों की विशेष देखभाल संबंधी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने परियोजना को प्रदेश की बुजुर्ग आबादी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए इसे शीघ्र पूर्ण कर जनसेवा के लिए समर्पित करने पर बल दिया।

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