Thursday, August 6, 2026
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किसान मेला में तकनीकी सत्रों की धूम, महिला सशक्तीकरण व श्री अन्न पर विशेष जोर

बांदा । उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला के अंतर्गत 27–28 फरवरी 2026 को विभिन्न तकनीकी सत्रों की शृंखला में बुन्देलखण्ड क्षेत्र की कृषि, उद्यानिकी, महिला सशक्तीकरण, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। मेले के दूसरे दिन आयोजित सत्रों में बड़ी संख्या में किसानों, महिला समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।

प्रथम तकनीकी सत्र का विषय “महिला उत्थान हेतु कृषि संबंधी सरकारी योजनाएं” रहा, जिसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना जैसी योजनाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, ऋण सुविधा, आधुनिक कृषि संसाधन तथा बाजार से जुड़ाव मिल रहा है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

“कृषि में महिलाओं की कार्यदक्षता वृद्धि हेतु उपयुक्त कृषि यंत्र” विषय पर डॉ. दीक्षा गौतम ने हल्के व एर्गोनोमिक डिजाइन वाले महिला-अनुकूल कृषि उपकरणों की आवश्यकता बताई। वहीं डॉ. दीक्षा पटेल ने स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सामूहिक बचत, सूक्ष्म वित्त और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने में एसएचजी की अहम भूमिका है। सत्र का समापन डॉ. प्रज्ञा ओझा द्वारा “पारिवारिक स्वास्थ्य वर्धन के लिए आर्ष गृह वाटिका तकनीकी” विषय पर व्यावहारिक जानकारी के साथ हुआ।

द्वितीय तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केन्द्र, बांदा के अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह ने बुन्देलखण्ड में श्री अन्न (मिलेट) खेती की उपयुक्त तकनीक पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि बाजरा, ज्वार, कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलें कम पानी में अधिक उत्पादन देती हैं और पोषण से भरपूर हैं। इसके अलावा धान्य, दलहन व तिलहन फसलों में समेकित कीट प्रबंधन (IPM), मधुमक्खी पालन, प्राकृतिक खेती के संसाधन निर्माण तथा उन्नत कृषि यंत्रों के उपयोग पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। मुर्गी पालन की उन्नत तकनीक को ग्रामीण परिवारों की आय और पोषण सुरक्षा के लिए उपयोगी बताया गया।

महिला उद्यमिता सत्र में बांदा की अर्चना शुक्ला और महोबा की मयंकिता चौरसिया ने अपने अनुभव साझा किए। कुलपति डॉ. एस. वी. एस. राजू व अन्य अधिकारियों ने स्टॉलों का निरीक्षण किया। मेले में फसल, फल-सब्जी व पशु प्रतियोगिताएं भी आयोजित हुईं, जिनमें 56 किसानों और 44 पशुपालकों ने भाग लिया।

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