Wednesday, August 5, 2026
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शंकराचार्य का आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का उप्र में होगा अंत : अखिलेश यादव

लखनऊ। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और पूर्ण गोहत्या प्रतिबंध की मांग को लेकर 7 मार्च 2026 को वाराणसी से ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की है। यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली होते हुए प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुंची। यात्रा के लखनऊ पहुंचने पर गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा)के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने पहुंचे। उनके साथ मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी, अनु टंडन आदि पार्टी नेतागण भी उपस्थित रहे।

अखिलेश यादव ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मिलने के बाद पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पूजनीय शंकराचार्य जी से मैं अभी मिलकर आ रहा हूं। उनसे आशीर्वाद और ज्ञान लेने हम लोग यहां पहुंचे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि शंकराचार्य का आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि जब प्रदेश में समाजवादी सरकार थी तो उस समय गाय की सेवा को लेकर हम लोगों ने बहुत फैसले लिए। भविष्य में भी जो कुछ कर सकते हैं, गाय की सेवा के लिए वह करेंगे।अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से सरकार ही नहीं चल रही। ये जनता के बीच भी नहीं जाते हैं। जनता के बीच में जाएं तो जीते ही ना।

पेट्रोलियम पदार्थ एवं गैस की समस्या के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि भारत सरकार के गलत फैसले की वजह से आज लोगों को लकड़ी पर खाना बनाना पड़ रहा है, घरों में चूल्हे तैयार करने पड़ेंगे। एलपीजी नहीं उपलब्ध हो पा रही है, इसकी पूरी जिम्मेदार भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार है।

जम्मू कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले के सवाल पर अखिलेश ने जवाब दिया कि दुख है इस तरह का अटैक नहीं होना चाहिए, सुरक्षा का इंतजाम पर्याप्त होना चाहिए। फारुख अब्दुल्ला बड़े नेता हैं, जितनी सुरक्षा दे सकती है भारत सरकार उतनी सुरक्षा उनको मिलनी चाहिएाउल्लेखनीय है कि ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा दिलाने और पूर्ण गोहत्या प्रतिबंध की मांग को लेकर 7 मार्च 2026 से वाराणसी से ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू की है। यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, सीतापुर होते हुए एक दिन पूर्व 11 मार्च को लखनऊ पहुंची। लखनऊ में प्रशासन ने 26 कड़ी शर्तों (भड़काऊ भाषण न देने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने आदि) के साथ इस कार्यक्रम की अनुमति दी थी। यहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे एक ‘धर्मयुद्ध’ करार दिया है और 81 दिनों तक परिक्रमा करने का ऐलान किया है। हालांकि यात्रा में कांग्रेस के समर्थन के बावजूद लखनऊ के कार्यक्रम में उम्मीद के मुताबिक भीड़ नहीं जुटी।

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