Tuesday, August 4, 2026
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मेडिकल रिसर्च में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा भारत : राजनाथ

लखनऊ। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सोमवार को लखनऊ स्थित किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और मेडिकल रिसर्च में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिला है। पहले गंभीर बीमारियों के इलाज में लोगों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो जाती थी, लेकिन अब आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निशुल्क इलाज मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बनाना भी रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का स्वास्थ्य तंत्र पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती, आधुनिक और जन-केंद्रित बना है।

राजनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा दो एम्स भी कार्यरत हैं। उत्तर प्रदेश अब “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज” की अवधारणा से भी आगे निकल चुका है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तभी बेहतर हो सकती है, जब पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और विशेषज्ञ उपलब्ध हों। इसी सोच के साथ सरकार ने मेडिकल शिक्षा का अभूतपूर्व विस्तार किया है। आज भारत जीन थेरेपी, न्यूक्लियर मेडिसिन और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है।

उन्होंने कहा वैज्ञानिकों ने हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन थेरेपी का सफल प्रदर्शन किया है, जबकि पुणे के एक संस्थान ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक नैनो मेडिसिन विकसित की है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान केवल इलाज पर नहीं, बल्कि बीमारियों की रोकथाम पर भी केंद्रित है।

केंद्रीय मंत्री ने अंगदान को मानवता के लिए सबसे बड़ा उपहार बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके अंग कई लोगों को नया जीवन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी अंगदान को लेकर कई भ्रांतियां और झिझक हैं, जिन्हें दूर करने में डॉक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। डॉक्टरों की संवेदनशील सलाह और संवाद किसी परिवार को अंगदान के लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है और इस सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। डॉक्टर का हर निर्णय केवल मरीज और उसके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश को प्रभावित करता है।

राजनाथ ने विश्वविद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने देश को अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सक दिए हैं, जिन्हें पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्मश्री और डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार जैसे सम्मानों से नवाजा गया है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू से जुड़े चिकित्सकों ने सेवा, समर्पण और संवेदनशीलता की अनुकरणीय मिसाल पेश की है।

दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उप मुख्यमंत्री बृजेशपठक, राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह और कुलपति प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद उपस्थित रहीं।

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