Tuesday, June 16, 2026
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उत्तर प्रदेश पुलिस के कार्यों की देश-विदेश में हो रही सराहना : मुख्यमंत्री

लखनऊ, 27 दिसंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को यहां कहा कि विगत साढ़े 08 वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के किये गये प्रयासों से लोगों के मन में प्रदेश के प्रति परसेप्शन बदला है। प्रदेश रूल ऑफ लॉ का बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के कार्यों की देश व विदेश में सराहना हो रही है।

मुख्यमंत्री योगी पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय ‘पुलिस मंथन’ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सम्मेलन-2025’ का शुभारम्भ करने के पश्चात बीट पुलिसिंग में सुधार एवं तकनीकी उन्नयन के लिए ‘यक्ष’ ऐप का लोकार्पण किया। इससे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने केवल परम्परागत पुलिसिंग को ही परिवर्तित नहीं किया है, बल्कि पुलिस व्यवस्था में समय के अनुरूप परिवर्तन करके दिखाया है। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में कानून-व्यवस्था हमारे सामने चुनौती के रूप में थी। लोगों के मन में प्रदेश के बारे में अच्छी धारणा नहीं थी। पुलिस कार्मिकों की ट्रेनिंग के लिए अवसंरचना का अभाव था। विगत साढ़े आठ वषों में प्रदेश नई प्रतिस्पर्धा का केन्द्र बना है। लोगों के मन में धारणा आयी है कि उत्तर प्रदेश भी कुछ कर सकता है। अवसंरचना सुधार से पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई है। वर्तमान में 60,244 पुलिस कार्मिकों की ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश पुलिस के स्वयं के प्रशिक्षण केन्द्रों में चल रही है। यह प्रदेश की गति व प्रगति को प्रदर्शित करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के रिफॉर्म को ध्यान में रखते हुए हुए 07 जिलों में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया है। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में केवल 02 साइबर थाने थे। वर्तमान में प्रदेश के सभी जनपदों में साइबर थानों का गठन किया जा चुका है। प्रत्येक थाने में साइबर हेल्पडेस्क स्थापित की जा चुकी है। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में केवल चार एफएसएल लैब्स थीं। आज प्रदेश में 12 अत्याधुनिक एफएसएल लैब्स बनकर तैयार हैं। 06 नयी लैब्स के निर्माण की कार्यवाही प्रचलित है। फॉरेन्सिक साइंस ईको सिस्टम के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ ने देश और प्रदेश में अत्याधुनिक प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में अपनी पहचान बनायी है। प्रदेश में एसडीआरएफ तथा यूपी एसएसएफ जैसी इकाइयां सफलतापूर्वक अपना कार्य संचालित कर रही हैं। वर्ष 2017 से पूर्व पुलिस के बैरक जर्जर स्थिति में थे। वर्तमान में प्रदेश के ज्यादातर जनपदों में पुलिस के बैरक अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ हाईराइज बिल्डिंग के रूप में स्थापित हो चुके हैं। यूपी पीआरवी 112 के रिस्पॉन्स टाइम को 65 मिनट से घटाकर 06 से 07 मिनट तक किया जा चुका है। यह चीजें दिखाती हैं कि प्रयास करने से अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस मंथन का यह कार्यक्रम इस दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसमें आयोजित अलग-अलग सत्रों में सीखने और सिखाने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। वैदिक उद्घोष ‘आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के जिस भी जनपद की पुलिस ने अच्छा प्रयास किया है, हमें उससे सीखते हुए आगे बढ़ना होगा।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यमंत्री के विजन को आत्मसात कर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में अपना योगदान दे रही है। पुलिस विभाग में ऐतिहासिक और रिजल्ट ओरिएण्टेड परिवर्तन दिखायी दे रहे हैं। विभाग में बीट पुलिसिंग, एण्टी रोमियों स्कॉयड जैसे इंक्रीमेन्टल परिवर्तनों के माध्यम से आम जनमानस में पुलिस के प्रति विश्वास का वातावरण निर्मित हुआ है तथा पुलिस के बारे में परसेप्शन में सुधार हुआ है।

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि सीएम याेगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य की पुलिस व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। वर्ष 2017 से अब तक 02 लाख 19 हजार पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गयी है। पुलिस कार्मिकों की प्रशिक्षण क्षमता कई गुना बढ़ी है। आधारभूत अवसंरचना में सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीक के प्रयोग के मामले में देश के अनेक राज्यों में अग्रणी स्थान पर है। डीजीपी ने कहा कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में पहले दिन 07 सत्र आयोजित किये जायेंगे,जिनमें बीट पुलिसिंग; महिलाओं, बच्चों के प्रति अपराध तथा मानव तस्करी विरोधी अभियान, थाना प्रबन्धन एवं उन्नयन, साइबर अपराध, मानव संसाधन विकास, कल्याण, पुलिस व्यवहार एवं प्रशिक्षण, अभियोजन एवं कारागार, सीसीटीएनएस 2.0, न्याय संहिता एवं फॉरेंसिक विषयों पर केंद्रित होंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन आपदा प्रबन्धन, सिविल डिफेंस एवं होमगार्ड्स; विशाल जनसमूह प्रबन्धन, इण्टेलीजेंस एवं उभरती चुनौतियां जैसे सोशल मीडिया, गैर-सरकारी संगठन और नेपाल सीमा, आतंकवाद निरोधक, मादक पदार्थ, गौ-तस्करी व संगठित अपराध पर केन्द्रित 04 सत्र आयोजित हाेंगे।

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