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कृषि शक्ति के रूप में उभरेगा उत्तर प्रदेश, कृषि पर नौ प्रतिशत बजट का जोर
लखनऊ। देश को कृषि उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में बड़ा संदेश दिया है। प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के पेश बजट में नौ लाख,12 हजार,696.35 करोड़ रुपये में से नौ प्रतिशत राशि कृषि एवं सम्बद्ध सेवाओं के लिए निर्धारित की गई है। यह आवंटन प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की गंभीर पहल माना जा रहा है।
कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही ने ‘हिन्दुस्थान समाचार’ से बातचीत में कहा कि उत्तर प्रदेश पहले ही गेहूं, धान, गन्ना, आलू, आम, अमरूद, आंवला और मेंथा उत्पादन में देश में अग्रणी है। अब सरकार विश्व बैंक सहायतित यूपी एग्रीज परियोजना के तहत एग्री-एक्सपोर्ट हब स्थापित करने जा रही है, जिससे किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने और निर्यात बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कदम भारत को वैश्विक कृषि आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थिति दिलाने में सहायक हो सकता है।
सिंचाई के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय विस्तार किया है। वर्ष 2016-17 में 2.16 करोड़ हेक्टेयर रहा सिंचित क्षेत्र बढ़कर 2.76 करोड़ हेक्टेयर हो गया है। वहीं फसल सघनता 162.7 प्रतिशत से बढ़कर 193.7 प्रतिशत तक पहुंची है, जो उत्पादन क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का सीधा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। ताप विद्युत उत्पादन क्षमता पांच हजार 878 मेगावॉट से बढ़कर नौ हजार 120 मेगावॉट हो गई है। जबकि दो हजार 815 मेगावॉट सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इससे ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति मजबूत होगी।
आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. विवेक निगम का मानना है कि यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो उत्तर प्रदेश न केवल राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में निर्णायक भूमिका निभाएगा, बल्कि कृषि निर्यात के क्षेत्र में भी भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान देगा। यह बजट संकेत देता है कि कृषि अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति का आधार बनने की ओर अग्रसर है।

