Tuesday, August 4, 2026
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प्रचलित मनुस्मृति के कुछ हिस्सों के ब्रिटिशकाल में संपादित होने की आशंका, पांडुलिपियाें की जांच की मांग उठी

  • आईआईएमसी के प्रो. राकेश ने मूल पांडुलिपियों व दस्तावेजाें की जांच की मांग की

लखनऊ, 13 मार्च । मनुस्मृति को लेकर एक बार फिर बहस तेज होती दिखाई दे रही है। कुछ विद्वानों ने दावा किया है कि आज प्रचलित मनुस्मृति के कई हिस्से ब्रिटिश काल में संपादित या प्रक्षेपित किए गए हो सकते हैं। इस संदर्भ में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के प्रो. राकेश उपाध्याय ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और पांडुलिपियों की पुनः जांच कराने की मांग उठाई है।

शुक्रवार को प्रो. राकेश उपाध्याय ने कहा कि मनुस्मृति के बारे में यह जानना जितना महत्वपूर्ण है कि इसे कब लिखा गया, उससे कहीं बड़ा प्रश्न यह है कि इसमें समय-समय पर संशोधन या प्रक्षेपण कब-कब हुए। बताया जा रहा है कि मनुस्मृति का पहला मुद्रित संस्करण ब्रिटिश शासनकाल में प्रिंटिंग प्रेस के माध्यम से प्रकाशित हुआ था। इतिहास के अनुसार 18वीं सदी में ब्रिटिश अधिकारियों के निर्देश पर इस ग्रंथ का संपादन और प्रकाशन कराया गया था। उस समय हिंदू समाज के लिए विधि-संहिता तैयार करने के उद्देश्य से विभिन्न पांडुलिपियों का संकलन कर एक समिति को सौंपा गया था। ऐसे में विद्वानों का आरोप है कि उस प्रक्रिया के दौरान मूल पांडुलिपियों की प्रमाणिकता की पर्याप्त जांच नहीं हुई और संभव है कि अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त अंशों को जोड़कर ग्रंथ तैयार किया गया हो। इसी कारण मनुस्मृति में कुछ विरोधाभासी श्लोक भी देखने को मिलते हैं। संभवता इसीलिए मनुस्मृति के मूल स्वरूप और उसके वर्तमान संस्करण को लेकर नए प्रश्न उठ रहे हैं।

इस पूरे विषय पर शोध की मांग करते हुए विद्वानों का कहना है कि देशभर के प्राचीन मठों, पुस्तकालयों और राजघरानों में उपलब्ध पांडुलिपियों की खोज और उनका वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि यदि प्राचीन और स्वतंत्र पांडुलिपियां मिलती हैं तो मनुस्मृति के वास्तविक स्वरूप को समझने में मदद मिलेगी।

प्रो. राकेश उपाध्याय ने कहा है कि इतिहास, संस्कृति और धर्म से जुड़े ऐसे विषयों पर बिना शोध और प्रमाण के निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। इसलिए केंद्र सरकार और संबंधित शोध संस्थानों से आग्रह किया है कि इस विषय पर पारदर्शी और व्यापक शोध परियोजना शुरू की जाए, ताकि मनुस्मृति के मूल स्वरूप को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट उत्तर मिल सके।

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