Thursday, August 6, 2026
Homeदेशमुखर्जी ने नेहरू की तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ सत्ता की राजनीति...

मुखर्जी ने नेहरू की तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ सत्ता की राजनीति को तिलांजलि दे दी थी : योगी आदित्यनाथ

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की नीति देश की अखंडता के सामने चुनौती बनी तो मुखर्जी ने सत्ता की राजनीति को तिलांजलि दे दी। वह सरकार से अलग हो गए थे।

इस अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि भारत माता के महान सपूत, महान स्वतंत्र संग्राम सेनानी, शिक्षाविद, स्वतंत्र भारत के प्रथम खाद्य उद्योग मंत्री, एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेगा का उद्घोष करने वाले डॉ. मुखर्जी की आज 125 वीं पावन जयंती है। इस अवसर पर भारत माता के इस महान सपूत की स्मृतियों को नमन करते हुए उत्तर प्रदेश शासन और उप्र की जनता जनार्दन की ओर से मै विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

योगी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी 1901 में बंगाल में उनका जन्म हुआ। उच्च शिक्षा अर्जित करने के साथ ही एक प्राध्यापक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की। मात्र 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दीं। देश की आजादी के आंदोलन में प्रमुखता के साथ जुड़े। बंगाल को जब पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कुत्सित चालें चली जा रही थीं, तब उसके खिलाफ वह उठ खड़े हुए थे। आज का जो पश्चिमी बंगाल है, अगर वह भारत का हिस्सा है तो इसमें जिन महान नेताओं ने अपने आप को समर्पित कर इस आंदोलन का हिस्सा बने थे और आवाज बुलंद की थी, उसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्र भारत में देश के खाद्य एवं उद्योग मंत्री के रूप में उन्होंने खाद् नीति और उद्योग नीति को प्रमुखता के साथ लागू करने का कार्य किया। लेकिन जब नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की नीति देश की अखंडता के सामने चुनौती बनी तो उन्होंने सत्ता की राजनीति को तिलांजलि दे दी थी। वह सरकार से अलग हो गए थे। भारतीय जनसंघ के गठन के बाद भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में उन्होंने देश की अखण्डता के लिए कार्य किया। एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान नहीं चलेंगे का उद्घोष करते हुए कश्मीर की परमिट प्रणाली का विरोध किया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 1953 में कश्मीर में ही उनका बलिदान होता है। डॉ. मुखर्जी ने धारा 370 के खिलाफ नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की नीति के खिलाफ जो शंखनाद किया था, उस सपने को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने साकार किया है। 2019 में कश्मीर में धारा 370 समाप्त करते हुए कश्मीर के अंदर भी भारत के कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने का कार्य किया गया।

यह हम सबके लिए सौभाग्य का विषय है। आज पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। बंगाल में डॉ. मुखर्जी से जुड़े सभी स्थलों के पुनराेद्धार के लिए वहां की डबल इंजन की सरकार प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। आज हम भारत माता के इस महान सपूत की स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह, मंत्री कपिल देव अग्रवाल, भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी समेत अन्य लोग उपस्थिति रहे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments